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अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस 2024: तारीख, थीम, इतिहास और महत्व

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस 2024: तारीख, थीम, इतिहास और महत्व

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस 2024 का महत्व

प्रतिवर्ष 19 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज, परिवार और समुदाय में पुरुषों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण योगदान को पहचानना और उनका सम्मान करना है। यह दिवस न सिर्फ पुरुषों के स्वास्थ्य और भलाई पर ध्यान केंद्रित करता है, बल्कि पुरुषत्व की सकारात्मक भूमिका और उनके जीवन से संबंधित मुद्दों को भी उजागर करता है। जहाँ एक तरफ हम महिलाओं की भूमिका को पहचानने में অकल्पनीय प्रयास करते हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरुषों की अहमियत और उनके योगदान को भी जादुई ढंग से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य इस भ्रम को तोड़ना है कि समाज में पुरुषों की भूमिका केवल पारंपरिक, कठोर और शारीरिक हिम्मत से जुड़ी होती है। वास्तव में, यह उनके मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक जीवन पर भी ध्यान देता है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।

इतिहास और विकास

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की शुरुआत सबसे पहले 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो में डॉ. जेरोम टीलुक्सिंग द्वारा हुई थी। इसका उद्देश्य पुरुषों की उपलब्धियों को उजागर करना और उनके जीवन पर प्रभाव डालने वाले मुद्दों का सामना करना था। हालांकि, इस दिवस को पहली बार 1992 में प्रस्तावित किया गया था, लेकिन इसे व्यापक रूप से नहीं स्वीकारा गया। डॉ. टीलुक्सिंग ने इसे एक नई प्रेरणा दी और इसे 1999 में पुनःस्थापित किया, जिससे इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई।

2024 की थीम: सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल

वर्ष 2024 के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की थीम "सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल" या "पुरुषों के स्वास्थ्य प्रति समर्पित" है। इसका उद्देश्य पुरुषों के स्वास्थ्य को सुधारना और उनके स्वास्थ्य चुनौतियों को कम करने के लिए काम कर रहे लोगों का सम्मान करना है। इस थीम के माध्यम से विभिन्न प्रकार के पुरुषों के स्वास्थ्य जैसे सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक भलाई को ध्यान में रखा गया है। यह सूत्र यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हर पुरुष को समाज में अपना योगदान देने का सही मौका मिले, और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समझने के लिए समुदाय को प्रोत्साहित किया जा सके।

अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के छह स्तंभ

  1. सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल का प्रमोट करें: ऐसे पुरुषों की पहचान करें जो अपने समुदायों में सकारात्मक योगदान देते हैं, न केवल मशहूर हस्तियों बल्कि हर रोज के रोल मॉडल्स को भी।
  2. पुरुषों के योगदान का उत्सव: पुरुषों की उपलब्धियों का सम्मान करें, विशेष रूप से परिवारों में पिता और देखभालकर्ताओं के रूप में उनकी भूमिका।
  3. लैंगिक संबंधों में सुधार: लिंगों के मध्य समानता और बेहतर समझ को बढ़ावा दें।
  4. पुरुषों के खिलाफ भेदभाव को उजागर करें: सामाजिक सेवाओं और समाजिक अपेक्षाओं में पुरुषों के सामने आने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाएँ।
  5. एक सुरक्षित दुनिया का निर्माण करें: ऐसी दुनिया बनाने का प्रयास करें जहाँ हर कोई अपनी पूरी क्षमता तक पहुँच सके।
  6. पुरुषों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें: पुरुषों के सामाजिक, भावनात्मक, शारीरिक, और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को संबोधित करें।

कैसे करें अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का जश्न

इस दिवस की धूमधाम अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से होती है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, लिंग भूमिकाएँ और सामाजिक अपेक्षाओं के मुद्दों पर कार्यशालाएँ और संगोष्ठी के आयोजन शामिल हैं। समुदायीय आयोजन, सार्वजनिक अभियान और स्वयंसेवी कार्यकलाप भी पुरुषों के योगदान का सम्मान करने के लिए आयोजित किए जाते हैं। स्वास्थ्य पहल इस उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसमें स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ावा देने वाले मुफ्त स्वास्थ्य जांच और स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। शैक्षिक कार्यक्रम भी सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल्स को उजागर करते हैं, छुट्टी के दिन उत्सवों को अधिक गर्व और अर्थपूर्ण बनाते हैं।

इस आयोजन में कैसे ले सकते हैं भाग

  • पुरुषों के स्वास्थ को बढ़ावा देना: पुरुषों को उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और आवश्यकतानुसार चिकित्सा परामर्श लेने के लिए प्रेरित करें।
  • लैंगिक समानता की वकालत करें: लैंगिक समानता को बढ़ावा दें और पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करने वाले हानिकारक रूढ़िवादी विचारों और व्यवहारों को चुनौती दें।
  • सकारात्मक पुरुषत्व का समर्थन: सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल्स का उत्सव मनाएँ और लड़कों और पुरुषों को उनकी भावनाओं और कमजोरियों को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • इवेंट्स का आयोजन करें: कार्यक्रम, संगोष्ठी, कार्यशालाएँ, या पुरुष मुद्दों जैसे कि मानसिक स्वास्थ्य, पितृत्व और करियर विकास पर पैनल चर्चाएं आयोजित करें।
  • परामर्श में समर्पण करें: ऐसे परामर्श कार्यक्रमों का समर्थन करें जो लड़कों और युवा पुरुषों को उनके समुदायों में सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल्स से जोड़ते हैं।
  • उपलब्धियों को पहचानें: विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों में पुरुषों की उपलब्धियों और योगदान का सम्मान और उत्सव मनाएँ।
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8 टिप्पणि

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    Akul Saini

    नवंबर 19, 2024 AT 18:28

    अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस की थीम 'सकारात्मक पुरुष भूमिका मॉडल' वास्तव में एक आवश्यक रिफ्रेश है। पारंपरिक पुरुषत्व के ढांचे जो भावनाओं को दबाते हैं, उनका विरोध करना अब सिर्फ मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक स्थिरता का भी प्रश्न है। डॉ. टीलुक्सिंग के प्रयासों को देखकर लगता है कि वैश्विक स्तर पर भी एक धीमी, लेकिन अटूट गति से एक नए नैतिक ढांचे की ओर बढ़ा जा रहा है।

    पितृत्व, सेवा, भावनात्मक सहायता-ये सब अब केवल 'महिलाओं के गुण' नहीं रहे। यह एक सामाजिक रूपांतरण है, जिसमें पुरुषों को अपनी आत्मा को बचाने का अधिकार मिल रहा है।

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    Arvind Singh Chauhan

    नवंबर 21, 2024 AT 16:16

    मैं तो बस इतना कहूंगा कि जब तक पुरुषों को यह नहीं समझाया जाएगा कि उनकी आँखों में आँसू लाना कोई कमजोरी नहीं है, तब तक ये सब बस एक शोर होगा।

    मैंने अपने पिता को एक बार रोते हुए देखा था-वो अपने बेटे के लिए बहुत कुछ त्याग चुके थे, लेकिन उनकी आँखों में जो चमक थी, वो किसी सम्मान से ज्यादा थी। इस दिन का मतलब यही है।

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    AAMITESH BANERJEE

    नवंबर 21, 2024 AT 23:39

    अगर हम असली बात करें तो पुरुष दिवस और महिला दिवस दोनों को एक ही तरह से देखना चाहिए। न तो एक को ऊपर रखना है और न ही दूसरे को नीचे।

    मैंने अपने बाप को देखा है-एक दिन में 14 घंटे काम करते हैं, फिर भी शाम को बच्चों को पढ़ाते हैं। उनकी कोई नोटिफिकेशन नहीं आती, कोई ट्रॉफी नहीं मिलती। लेकिन वो चलते हैं।

    हमें बस इतना करना है कि उन्हें देखें, सुनें, और एक छोटा सा 'धन्यवाद' कह दें। ये बहुत कुछ बदल देगा।

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    Akshat Umrao

    नवंबर 22, 2024 AT 17:09

    सही बात है 😊
    पुरुषों को भी रोने का अधिकार है 💙
    और उनकी भावनाएँ भी मायने रखती हैं 🤝

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    Sonu Kumar

    नवंबर 24, 2024 AT 15:56

    अरे, ये सब तो बस 'वेल्फेयर वॉशिंग' है। जब तक सरकारें नहीं बदलेंगी, जब तक शिक्षा व्यवस्था में पुरुषों के लिए स्पेशल ट्रैक नहीं बनेंगे, जब तक आपके घर में बेटे को बोला न जाए कि 'लड़के रोते नहीं', तब तक ये सब बस एक फेसबुक पोस्ट है।

    मैंने अपने बचपन में एक बार रोया था-मेरे पापा ने मुझे चार दिन तक नहीं बोला। आज भी वो मुझसे बात नहीं करते। तो ये थीम? बस एक शब्दावली का खेल है।

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    Deepti Chadda

    नवंबर 26, 2024 AT 06:36

    इस दिन को मनाने की जरूरत ही क्यों? हमारे देश में तो लाखों लड़कियाँ अभी भी स्कूल नहीं जा पा रहीं और यहाँ पुरुषों के लिए दिवस मनाने की बात कर रहे हो! 😒
    पहले महिलाओं की स्थिति सुधारो फिर बात करो! 🇮🇳

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    Rampravesh Singh

    नवंबर 27, 2024 AT 07:38

    श्रीमती चड्डा के टिप्पणी को लेकर एक स्पष्टीकरण देना आवश्यक है। अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का उद्देश्य महिला दिवस के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके साथ समन्वय स्थापित करना है।

    एक समाज जहाँ महिलाएँ स्वतंत्र हैं, वहीं पुरुष भी अपने भावनात्मक दर्द को व्यक्त कर सकते हैं। यह दोनों के लिए स्वाधीनता का आधार है।

    जब हम लड़कियों को शिक्षा देते हैं, तो उनके पिता, भाई और पति भी उसी संस्कृति में बढ़ते हैं-जहाँ सम्मान और सहयोग दोनों के लिए अपेक्षित है।

    इसलिए, यह दिवस एक विशेष अवसर है कि हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ें जहाँ कोई भी अपनी भूमिका के लिए दोषी नहीं ठहराया जाए।

    हम जब एक आदमी को उसकी भावनाओं के लिए गलत नहीं कहते, तो हम एक लड़की को भी उसके अधिकारों के लिए गलत नहीं कह पाएंगे।

    यह एक अन्तर्संबंधित चक्र है। एक टूटने पर दूसरा भी कमजोर हो जाता है।

    इसलिए, यह दिवस न केवल पुरुषों के लिए है, बल्कि समाज के लिए है।

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    sunil kumar

    नवंबर 28, 2024 AT 08:19

    आप सभी के विचार बहुत गहरे हैं। मैं एक सामान्य शिक्षक हूँ, और दिनभर लड़कों के साथ बैठकर बात करता हूँ।

    एक बच्चा मुझसे पूछता है-'सर, क्या अगर मैं रोऊँ तो लोग मुझे कमजोर कहेंगे?'

    मैं उसे बताता हूँ-'नहीं, तुम अगर रोते हो, तो तुम अपने दर्द को स्वीकार कर रहे हो। और यही तो सबसे बड़ी ताकत है।'

    लेकिन जब वो घर जाता है, तो उसके पिता कहते हैं-'लड़के रोते नहीं।'

    इसलिए, ये दिवस सिर्फ एक दिन नहीं, एक शिक्षा की शुरुआत है।

    हमें बच्चों को शिक्षित करना होगा-न केवल पाठ्यक्रम से, बल्कि मानवता से।

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